कुदरत का कहर एक बार फिर नेपाल के पहाड़ी इलाकों पर भारी पड़ रहा है। गोरखा जिले में बुढ़ी गंडकी नदी के उफान ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। अचानक आई इस तेज बाढ़ ने तीस से ज्यादा घरों और महत्वपूर्ण पुलों को अपने साथ बहा लिया है, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है।
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अलर्ट जारी किया है। नदी किनारे बसे लोगों को घर खाली कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
अचानक कैसे बिगड़े हालात
गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र में यह तबाही देखने को मिली है। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिउरीबास के ऊपरी हिस्से में संभावित भूस्खलन के चलते नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी बहकर आई, जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज को अपनी चपेट में ले लिया।
सल्लेरी, पैयुका और जगत जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में नदी के तेज बहाव ने दर्जनों रिहायशी मकानों को जमींदोज कर दिया है।
संपर्क टूटने का बड़ा संकट
पहाड़ी इलाकों में नदियां पार करने के लिए झूला पुल ही मुख्य जरिया होते हैं। इस आपदा में एक अहम झूला पुल भी पूरी तरह बह गया है। पुल टूटने से कई गांवों का आपस में संपर्क कट गया है। लोगों का एक जगह से दूसरी जगह आना-जाना बंद हो गया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भी भारी मुश्किलें पेश आ रही हैं।
हालांकि, राहत भरी बात यह है कि अभी तक किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा और स्थानीय वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुङ स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन और स्थानीय लोगों की मुश्किलें
नेपाल के हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और मानसूनी अनिश्चितता के कारण इस तरह की अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और नदी के करीब जाने से पूरी तरह बचें। जैसे-जैसे मलबा हटाने और नुकसान का सटीक आकलन करने का काम शुरू होगा, स्थिति और साफ हो पाएगी।